मई की छुट्टियाँ

जब भी हवा में एक ज्वर की तरह
उतर आती है मई
पुलों और पटरियों की याद दिलाती
चन्द पीले दिन तपती चिटकनियाँ और शर्बत के गिलास
पिघलने लगते हैं आर्द्र होकर हमारे भीतर
याद रह जाते हैं हमें निर्जन नदियों के तट
चपटे पेट वाली नौकाओं के औंधे पड़े शरीर
जल में लुढ़की हुई थोड़ी सी भाग्यशाली झाडि़यों के आकार
प्यास एक हिचकी की तरह
अटक रही होती है गले में
और ग्रीष्म सफ़ेद कफ़न की शक्ल में
दृश्यों के कंधों पर रखी दिखलाई देती है

छुट्टियों से लौटना ही होता है
हमें हर बार उसी शैली में बाँध कर अपना सामान
बदले में छोड़ कर पीछे
बेफ्रि़क अपना व्यतीत समय चेहरे और बदली हुई दिनचर्याएँ
याद रह जाते हैं
पैदल चलने के अवसर सफ़र की सनसनी
अपरिचित दुकानदारों के सम्बोधन

अंत तक दिखलाई देते हैं कटी हुई सरसों के खेत
और उड़ते हुए कबूतर खाली मैदान और दिशाएँ
पुल और पटरियाँ

ये सब किराएदारों
जैसे रहते हैं हमारे भीतर
अगली मई तक
एक पीले ज्वर की तरह।

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