प्रलय से पहले चीज़ें

मामूली चीज़ों की शक्ल धर कर प्रतिदिन
असंख्य बार नियामतें दुर्निवार प्रलय के रोकती हैं
जैसे ध्यान से देखने पर दरवाज़े दस्तक की प्रतीक्षा में डूबे जाने पड़ते हैं
किसे ख़बर घर के बर्तन चाहते हों
उन में लोग प्रतिदिन स्वादिष्ट भोजन ही किया करें

खिड़कियों की एकमात्र अभिलाषा हो हर सुबह ढेर-सी धूप उनके भीतर आए
फ़र्श चाहते हों वे नियमित रूप से पोंछे जाएँ ताकि नये और दमकते से दीखें कमरे
शीशों की इच्छा हो आत्ममुग्धता में आप को निहारतीं सिर्फ़ सुन्दर स्त्रियाँ ही
उनके सम्मुख खड़ी हों
सोचती हों किताबें प्रतिदिन उन्हें ध्यानपूर्वक पढ़ा जाए

कैसी-कैसी ख़ूबसूरत चीज़ें हमारे निकट बसती हैं
हमें सम्मोहन और सनसनी में डुबोती हुई

कभी पल भर भी आप अगर उनकी तरफ देखें तो पाएँगे
वे हर विध्वंस और अवमूल्यन के विरुद्ध
दुनिया को रहने लायक एक दिलचस्प जगह बनाए रखने में
चुपचाप हमारी मदद करती हैं

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