मधुमक्खियाँ

किस आत्मलीनता में डूबी रहती हैं मधुमक्खियाँ
वे कब सोती और कब जागती हैं
निरन्तर उड़ती और गुनगुनाती ही क्यों दिखलाई देती हैं मधुमक्खियाँ
क्या वे जानती हैं कब होगा उनका देहांत
वे कब आई थीं पृथ्वी पर और किस दिन के लिए जीवित हैं

वे कैसे खोज लेती हैं फूलों के झुरमुट,
सुगन्ध के òोत
उपयुक्त आकार के तने

जीवन के उजालों की स्मृति हम में जगातीं
वे निद्र्वंद्व व्यस्त रहती हैं
पराग से शहद बनाने की कर्तव्यपरायणता में
कालचक्रों से अप्रभावित मौसमों से उदासीन
हमारी जिज्ञासाओं से निरपेक्ष
बनाती रहती हैं वे काली दाढ़ी जैसे घने छत्ते

लोग बेरहमी से भले ही जिन्हें तोड़ डालें
मधुमक्खियों के डंक की संरचना पर
विज्ञान के छात्र भले ही लिखते रहें शोध-लेख

कभी खंडन नहीं करतीं वे
प्रकृतिशास्त्रियों का चिन्तकों और कवियों का

दुनिया की एक नायाब चीज़-
शहद का आविष्कार करते हुए
अनजाने ही छोड़ जाती हैं
न जाने किसने लिए अनबूझी पहेलियाँ

Leave a Reply