नदी-यात्रा

बन्द सन्दूकों से लदी नावें काली औरतों की भीड़ बहते हुए पानी की आवाजें
शोरगुल से भरी यात्राओं का कोई अन्त नहीं
सख्त हाथों वाले उम्र को कोसते मल्लाह
दूर चमकती हैं रोशनियाँ
पीछे शान्त छूट गया कोई गाँव अधबने मकान
एक खास गंध वाली धूल की बोली में बात करने को उद्यत गलियाँ
जल्दी-जल्दी छिप जाने वाले दृश्य
कहाँ-कहाँ छुआ है वक्त का वह चाकू ?
उभर आया कोई नीला निशान
दिखाओ तो दिखाओ सचमुच वक्त के काटे का निशान
बहुत जल्दी उभर आता है !
लेकिन दर्शन या मुहावरे सोचने का अवसर कहाँ है ?

मैंने कहा न मित्र अपने हाथ इस पानी में डाल दो
लगातार छूट रहा है कोई अनदेखा गाँव
जिसके नाम से हमारा कभी ताल्लुक़ नहीं रहा
न हुआ कभी कोई परिचय
अस्तु, बातचीत का तो कोई प्रश्न ही नहीं ण्

किंतु वक्त का कसैला चाकू अब भी दृश्यों को नोंक से छू रहा है
देखो कभी यह सब कुछ लुप्त हो जाएगा
इसे अपनी आँखों में सुरक्षित रख लो

आखिरी बार डाल लो जल में अपने हाथ ण्
देखो दूर चमकती हैं रोशनियाँ और छू रहा है हमेशा की तरह
तमाम दृश्यों को वक्त का चाकू
कभी यह सब लुप्त हो जाएगा देखना

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