कविता और पहाड़

‘‘देखो

इस पहाड़ को
आदमी तो इसके सामने बिलकुल चिडि़या जैसा लगे’’
देख कर पहाड़ एक अनपढ़ विस्मित स्त्री बोली
अपने मर्द से

काश ! कवियो, सुन सकते तुम भी उसकी कविता…..
यह भी लगा मुझे
कवियों को अपने पढ़े-लिखे होने की ख़ुशफ़हमी भला क्यों है ?

 

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