पर तुम बिछडना न कभी

 

गुलाब मे ही कान्टे होते है,

पर छुना न उन कान्टो को कभी!

चाहे बिछडे गुलाब से कान्टे,

पर तुम बिछडना न कभी!!

सरगम से ही आवाज होती है,

सुनते है वो मधुर गीत सभी!

चाहे बिछडे गीत से सरगम,

पर तुम बिछडना न कभी!!

राह मे ही मन्जिल होती है,

पर भटकना न तुम राह कभी!

चाहे बिछडे राह से मन्जिल,

पर तुम बिछडना न कभी!!

इन्सान से ही दुनिया होती है,

पर समझे न ये इन्सान कभी!

चाहे बिछडे दुनिया से इन्सान,

पर तुम बिछडना न कभी!!

3 Comments

  1. Deepankar sethi Deepankar sethi 21/06/2012
  2. yashoda agrawal 22/06/2012
  3. Ravi Bhattacharya 19/08/2012

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