कोई जब हाथ ये देखे मैं तेरा हूँ निकल आये

कोई जब हाथ ये देखे मैं तेरा हूँ निकल आये

नमी भी हो चले रुखसत चश्म से खूँ निकल आये

तुम्हारी याद से निकलूँ किसी कागज पे कुछ लिखकर

हर इक मिसरे को जब देखूं गज़ल में तू निकल आये

संजीव आर्या

Leave a Reply