दरवाज़े

दरवाज़ों को ले कर नींद में भी चैंक कर उठ सकती हैं गृहणियाँ

कि वे ठीक से बन्द हैं भी या नहीं

अगर वे रात खुले रह जायें तो

बन जाते हैं पतियों की हद से ज़्यादा लापरवाही का प्रतीक

घर से बाहर निकलते वक़्त उन पर ताले भली प्रकार लगे हों

और मज़बूती से बन्द हो उनकी साँकल

स्त्रियाँ स्वप्न में भी घर भर की सुख-समृद्धि को निरापद देखना चाहती हैं

वे यह भी चाहती हैं

उन्हें अजनबियों के लिए खोला न जाये

जान पहचान वालों को भी इत्मीनान हो जाने तक अक्सर

दरवाज़े के सामने खड़ा रहना पड़ जाता है

वे प्रतीक्षा करवाते हैं दूध वालों को लगभग छह बजे

इसी को संद से भीतर ठेले जाते हैं अख़बार

ताला खोलने पर इसकी देहरी पर लेटी मिलती हैं कई बार चिट्ठियाँ

दरवाज़े जानते नहीं उनकी इबारत,

पर डाकिये से जि़रह किये बिना दरवाज़े  उन्हें भीतर आने देते हैं

आँधी में भड़भड़ाते दरवाज़े

बच्चों को पीटने का उपलक्ष्य हो जाते हैं

जब वे आवाज़ करते हैं

उनके क़ब्ज़ों में तेल डाल कर चुप कराना लाजि़मी हो जाता है

उनका काठ वर्षा में भीगता है निर्विरोध

कभी-कभार दीमकों को उनका ज़ायका बड़ा पसन्द आता है

तब दरवाज़े ध्यान आकर्षित करते हैं व्यस्त गृहस्वामियों का

इनके जिस्म पर अक्सर कुछ निशान या इबारतें भी देखी जा सकती हैं

जो पड़ोस के बच्चों की कारगुज़ारी का नतीजा होंगी

बिजली की घंटियों के आविष्कार से पहले

इन्हें खटखटा कर खुलवाने की प्रथा थी

तब दस्तक के अन्दाज़ मात्र से भीतर लोग जान जाते थे

कौन खड़ा होगा बाहर

दरवाजों से ही भीतर आते हैं घर के स्वप्न, मर्यादाएँ, असबाब, दुःख

कभी-कभार हमें वे  व्यर्थ की हिंसा से भी बचाते हैं

या ऐसे समाचारों में तब्दील हो जाने से

दोपहर लगभग फ़ुरसत में रहने वाली

औरतों की जिनमें गोपनीय दिलचस्पी हुआ करती है

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