स्त्री, तुम कहां हो ?

कहां है
एक स्त्री
जो सारे संसार को बुहारती है
एक स्त्री जो सम्पूर्ण दुनिया के लिए
बेलती है रोटियां
एक स्त्री जो विश्व भर के कपड़े धोती है
एक स्त्री जो अनगिनत पतियों के लिए बिस्तर में लेटती है
असंख्य बच्चों की मां बनने के लिए
मुझे उस स्त्री की चिंता है
पर यकीन मानिए मैं कुछ नहीं कर पा रहा
सहानुभूति में कविता करने के सिवाय

अफसोस तो यह
कि उस स्त्री को ऐसी आलतू-फालतू बातों के लिए वक्त ही नहीं
सदियों से वह व्यस्त है किसी मधुमक्खी की तरह

पाठको
आइए, हम सब मिल
कर उस स्त्री को खोजें
जो
बुहारने बेलने धोने और माँ बनने के एकांत में
हमारी दुनिया को ध्वस्त होने से चुपचाप बचा रही है।

One Response

  1. Sarthi8686 18/06/2012

Leave a Reply