अँधेरी रातों में भी उजाले थे

अँधेरी रातों में भी उजाले थे
तुम ही थे जो मेरा मन संभाले थे
मेरी आवाज़ में जो लय आई है
तुम्हारे शब्दों से सुर निकाले थे

-संजीव आर्या

Leave a Reply