माँ —-

सच माँ —-

माँ कभी तो बतिया जाओ ———–

आओ थोडा वक़्त निकालो

मुझसे यूँ ही बस बतियालो

कुछ मेरे दिल का गुब्बार सह लों

 फिर नम आँखों से मुस्कुरा दो

न कुछ बोलो ,चाहे मूक ही रह लों

पर मेरे दिल का हाल तो जानो

कौन कहाँ मेरा रहा है अब कितना

किसने माना है मुझे अब अपना

देखो मेरे जले पर किसने ,मुंह से उफ़ निकाली

किसी की आँख से भी न बहा था पानी

किसने बस एक दिखावा भर किया था

फिर मुझसे अपना मुंह मोड़ लिया था

फिर इस बोझिल उदास मन ने तुमको कितना याद किया था

सच माँ —-

आज मैंने फिर से स्वंय को अनाथ कह लिया था

By Smt Renuka Madan Ji (Punarnva group page)

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