कुछ अशआर

१.तुम्हे जबाँ पे न लाये बस दिल के अन्दर रख लिया,
हमने इन आँखों में इक गहरा समंदर रख लिया |

२.जो दौलतमंद था वो घर ले गया उसे ,
हम फ़ाक़ाकश थे तो तस्वीर बना डाली |

३.तेरे ख़त में इश्क की गवाही आज भी है,
हर्फ़ धुंधले हो गए पर स्याही आज भी है |

४.मेरे गाँव का घर मेरे दिल के बड़ा नज़दीक है,
बस मुझे शहर से लौटते-लौटते ज़माने निकले |

५.अभी सदाएं उसे न देना ,अभी वो राह से गुज़र रहा है ,
कदम हसीं वो जहाँ भी रखे , वहीँ ज़माना ठहर रहा है |

६.माँ ने मुद्दतों इन्तेज़ार करते हुए दम तोड़ दिया,
तुम दो अश्क बहाकर दूध का क़र्ज़ चुकाने निकले |

७.फक्र करता है अब बाप जो उम्र भर फर्क करता रहा
कि बेटी चाँद पर हो आई है,बेटा चाँद को तकता रहा

-संजीव आर्या

3 Comments

  1. yashoda agrawal 14/06/2012
  2. Sushilashivran 16/06/2012
  3. Sri Prakash Dimri 16/06/2012

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