ज्योतिष चर्चा

पहले नक्षत्रों को पहचानो फिर उनकी स्थितियां जानो
!नक्षत्रों का चरण देख लो, पीछे तिथि का करण देख लो !
किसका किससे वरण देख लो, दृष्टि योग से भरण देख लो !
उहापोह भली विधि करके, ग्रह भावों की शरण देख लो !
ग्रह सम्बन्धों की गणना इनके स्वामी से हैं करना !
इनके यदि स्वभाव को भूले निष्कर्षों में होगे ढीले !
ग्रह बल का अनुमान जरुरी वरना गणना रहे अधूरी !
चर र्स्थिर कारक की छमता गुणी ज्योतषी मन से गुनता !
ग्रह अंशों पर ध्यान लगाना , इससे फिर षट वर्ग सजाना !
चलित चक्र गत निश्चित हो भाव मिलता तभी स्पष्ट प्रभाव !
मचलती दृष्टि बनाती योग काले उजले देती भोग !
भोग दशा गोचर का योग जातक करता जीवन भोग !
आप गुणीजन यह निवेदन मानना है !

अभी अभ्यास मेरा अक्षर पह्चानना !

अक्षर पह्चानना !!

 

संकेत : वरण = conjuction. भरण = aspects.

शरण = placements मचलती दृष्टि = transists

काले उजले = Good / bad results .
भोला नाथ शुक्ल

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