अश्क, यादें , तन्हाइयाँ ये तो सब इनाम है

अश्क, यादें , तन्हाइयाँ ये तो सब इनाम है
प्यार के बाजार में अब जिस्म का ही नाम है
शहर जब दवा करे तो ज़ख्म और दुखने लगे
कोई मिलने की करे दुआ तो मुझे आराम है

-संजीव आर्या

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