ये दुनिया खुबसूरत है….

मिले हैं जब से तुमसे कदम

हर बस्ती गा रही रही  है , हर रस्ता हंस  रहा है

मिले हो जब से तुम  हमदम

हर एक शख्स बाराती है , हर एक समां महफ़िल

बने हो तुम जब से मेरे सनम

ख़ामोशी में भी इशारे हैं,बारिश में भी शरारें हैं

हुई हैं जबसे इनायत मुझपे करम

हर ओर बस तुम्हारी ही सूरत है

सचमुच दुनिया बहुत खुबसूरत है …..

मिले हैं जबसे तुम्हारे आँचल के कोने

सावन बुलाने पर आता है हवाएं इशारों पर उमड़ती  हैं

लगी हो जबसे तुम इन कन्धों पर सोने

होशो हवास खोता जाता है हसरतें खुद से लड़तीं हैं

सता  कर हमें जब खुद लगती हो तुम रोने

यह मंज़र भी प्यारा लगता है,जब आंसुओं की लडियां अकड़ती हैं

हम चैन से जीयें और सुकून से मर जाएँ

हमें तुमसे बस इतनी मुहब्बत है

सचमुच दुनिया बहुत खुबसूरत है …

बाहों में लजाकर शरमाकर सिमट जाना

और फिर हवाओं के सर्द होने का बहाना

इतरा कर नाजों से पलटना और जुल्फे झटकना

और फिर कहना की क्यूँ अल्हड है मन अपना

क्यूँ अच्छा लगता है तुम्हरे नखरों को भी सहना

कुदरत का करिश्मा लगती हो कभी ,कभी सपना

साजा कर रखें तुम्हे पलकों पर ताउम्र

क्या इतनी हमें बस इजाज़त है

सचमुच दुनिया बहुत खुबसूरत है …

–शिवेंद्र ..

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