मत सिखलाना बच्चों को

मत सिखलाना बच्चों को
वे अवगुण जो नुकसान करे,

पश्च्ताना पड़े खुद तुमको भी
न बच्चों को आराम मिले,

मैर न लेना गलती से बच्चे की
चाहे जिद्दी बालक हो कितना,

तत्काल करो पड़ताल बुरे की
जो शिक्षित हो बचपन उनका,

अहसास करा अपनी बातों से
दे प्यार के ढंग से समझाना,

अच्छा क्या है और क्या है बुरा
तुम अर्थ सभी का बतलाना,

माँ पढने को कर्तव्य मानकर
पुनः शिक्षा खुद ही ग्रहण करे,

जो छुट गई थी हाथ से पुस्तक
स्वंम पढना उसे आरम्भ करे,

इक कोशिश करके देखो जरा
पुनः ज्ञान का फूल ही खिलता है,

माँ इक सभ्य-सच्ची बन दिखलाओ
घर की शिक्षा का बच्चे को ज्ञान दिलाओ,

अपने बच्चे को पढना सिखाओ
परिणाम निकल कर आएगा,

पढते-२ जब बच्चा,थक सो जाएगा
तभी परीक्षा में सफलता पाएगा,

हे माँ तू ऐसा कर दिखलाना,जैसे
किया करते थे महा-आदर्श पिता,

तभी- तुम अच्छे कहलाओगे
अभिभावक हो आप या माता-पिता,

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