इन्द्रियन का साथ पाय

इन्द्रियन का साथ पाय, चिंघरे ये हाय – हाय,
रंग-रंग रंग नहीं, ये हाथी बदरंग है |

कुबुद्धि कुमाणसों में, रहे क्या सुबुद्धि समझ,

धृक-धृक कारुंस, कलंक ही कुसंग है |

सज्जनों के संग-संग, संग में सदा ही सुख,
                             दुर्जनों का संग दुःख, मणिधर भुजंग है |
कहता शिवदीन राम, राम ही बचावे बचे,
                                 महात्मा महावत है, मन तो मतंग है |

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