उठी के परभात गई जमुना संग

उठी के परभात गई जमुना संग  श्यामा के गोपी अनेक  चली है,

आई गये नंद लाल  सखी  धडके  छतियां  सकुचा  के  मली  है ।

होनहार की बात कहे शिवदीन , लली न टली ललिता न टली है,

झगरों न  करो नखरों न  करो नहीं कॄष्ण भले न या राधा भली है ।

Leave a Reply