पैर की बाजत पैजनियां

पैर  की  बाजत  पैजनियां गज  गामिनी  चाल  निराली  चली है,

मोह  लियो  मन  मोहन  को  उर देखत  ही  वृष  भानु  लली है ।

प्रेम  अपार न पावत पार वे आय  के श्यामा को श्याम  छली है,

शिवदीन भली कली खूब खिली बरजोरी  मिले वे याही  गली है ।

Leave a Reply