चलो एक बार कर के देखते हैं…

अगर इश्क खता है तो खता ही सही
चलो एक बार यह भी कर के देखते हैं
प्यार अमर यह सुनते हैं हम किताबों में
चलो एक बार संग संग मर के देखते हैं
सूखे दरख्तों में फिजायें खिलती हैं अगर कहीं
तो चलो इन दरख्तों में आह भर के देखते हैं
सुनते हैं ज़माना करता है रुस्वा आशिकों को
चलो एक बार ज़माने से जंग कर के देखते हैं
सुनते हैं मिलती नहीं मंजिल कभी मोहब्बत को
चलो एक बार यह सफ़र भी तय कर के देखते हैं
अगर जलते हैं बदन है इंतज़ार के शरारों से
तो चलो उस आग में खुद पिघलकर देखते हैं
हर लम्हा तड़प है जिस रिश्ते की लकीरों में
ऐसे रिश्ते की ताउम्र ख्वाहिश कर के देखते हैं
फना हो कर भी जुदा न हो जो साथी खुदी से
ऐसे साथी की इबादत की तमन्ना कर के देखते हैं
अगर इश्क खता है तो खता ही सही
चलो एक बार यह भी कर के देखते हैं
प्यार अमर यह सुनते हैं हम किताबों में
चलो एक बार संग संग मर के देखते हैं…

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