पौने दस बजे की कविता

 

बजाना घड़ी का
पौने दस।
पौने दस बजे का एक अर्थ हो सकता है
पौने दस पर सुनाई पड़ी आवाजें। रख कर पाँव
जमीन पर लोग इच्छित जगह आ पहुंचे निर्बाध।
पौने दस बजे नहीं खरीदनी पड़ी कभी
गिलहरी को हजामत के लिए ब्लेड।
पौने दस बजे अगर मैं नहीं हँू
हिलता हुआ पेड़ तो मैं छत पर
बोलते कौए का ध्यान अपनी ओर कभी
आकर्षित कर पाऊं-इसमें स्वयं मुझे
सन्देह है। पौने दस पर स्थिर आकाश।
नीम पर निम्बोली। बच्चे दे रहे हैं
प्रश्नों के जवाब। हाथ व्यस्त हैं। अरबों।
पौने दस बजे।
संसार के निहायत सहज
कार्य-व्यापार का एक अद्भुत क्षण।

लो उड़ी है-पेड़ से एक चिडि़या।
उसी क्षण खोली किसी ने कमरे की खिड़की।

भड़क उठी आग कविता की तभी
पौने दस बजे

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