मेरी किताब मेरा ज्ञान

मुखड़ा: कोई जब राह न पाए, मेरे संग आए
के पढ़-पढ़ ज्ञान बढाए, मेरी किताब मेरा ज्ञान – २
अन्तरा: अनपढ़ का यही है दस्तूर, ज्ञान बिना अकेला मजबूर
ज्ञान को मनो, तो सब दुःख दूर – २
किसी से काहे को धोका खाए, मेरे संग आए
के पढ़-पढ़ ज्ञान बढाए , मेरी किताब मेरा ज्ञान – २
अन्तरा: ज्ञान के हैं रूप हजार , पर मेरी सुने जो संसार
पढ़ लो – पढाई , रे लिख लो – लिखाई – २
कोई ना वक़्त गंवाए , मेरे संग आए
के पढ़-पढ़ ज्ञान बढाए , मेरी किताब मेरा ज्ञान – २
अन्तर: ध्यान का है ज्ञान ही नाम , तुम पढ़कर बनना महान
पढाई का यारो करो सम्मान – २
अब कोई दूर न जाए , मेरे संग आए
के पढ़-पढ़ ज्ञान बढाए , मेरी किताब मेरा ज्ञान – २
अन्तरा: बच्चों का है पढाई का काम, करो पढाई सुबहों – शाम
पाठ – पढ़ लेना अपना तमाम
अब कोई भूल ना जाए, मेरे संग आए
के पढ़-पढ़ ज्ञान बढाए , मेरी किताब मेरा ज्ञान – २
अन्तरा: कलम का लेख ही नाम, तुम लेखक बनना महान
कलम का बच्चों करों सम्मान – २
खेल में कलम खो ना जाए
किसी से क्यों लिखाए, मेरे संग आए
के पढ़-पढ़ ज्ञान बढाए , मेरी किताब मेरा ज्ञान – २
कोरस: मेरी किताब मेरा ज्ञान – मेला ज्ञान —– > ( बच्चों की आवाज )
: पढ लो , मेरी किताब मेरा ज्ञान – मेला ज्ञान
: सुनलो , मेरी किताब मेरा ज्ञान – मेला ज्ञान
: लिख लो , मेरी किताब मेरा ज्ञान – मेला ज्ञान
: जानलो , मेरी किताब मेरा ज्ञान – मेला ज्ञान
: देखो -२ , मेरी किताब मेरा ज्ञान – मेला ज्ञान

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