आखिर क्यों

आखिरक्यों

 

आखिर क्यों अब कृष्ण भी देखते  नहीं,

आखिर क्यों सुदामा भी जांचते नहीं,

आखिर क्यों अब अर्जुन चेतते नहीं,

आखिर क्यों गांडीव भी लक्ष्य भेदते नहीं,

आखिर क्यों दशरथ अपने वचन रखते नहीं,

आखिर क्यों अब राम वन गमन करते नहीं,

आखिर क्यों लक्षमण भी साथ देते नहीं,

आखिर  क्यों भरत भी अग्रज से शिक्षा लेते नहीं,

आखिर   क्यों हनुमान रण   में डटते नहीं,

आखिर क्यों आज भी द्रोणाचार्य एकलव्य को दीक्षा देते नहीं ,

आखिर क्यों एकलव्य भी सधते  नहीं,

आखिर क्यों अब   AARUNI  गुरु आज्ञा शिरोधार्य करते नहीं,

 

आखिर क्यों शिव भी तपते नहीं,

आखिर क्यों अब तुलसी भजते नहीं,

आखिर क्यों रसखान भी रसते नहीं,

आखिर क्यों चाणक्य भी राष्ट्र हित विचरते नहीं,

अब बुद्ध भी शांत  द्रष्टि से वसुंधरा निहारते  नहीं  ,

आखिर क्यों  अब मीरा दीवानी नहीं होती,

आखिर क्यों राष्ट्र नष्ट  करते  हुए सभी को परेशानी नहीं होती,

आखिर  क्यों अब कौटिल्य भी निराश है,

आखिर क्यों जयशंकर की लेखनी भी उदास है ,

महा तपस्वी भागीरथ  भी हताश है,

ब्रम्हा – गंगा  में अब भी जल है किन्तु जीवन में प्यास है,

समय नहीं है और चिंतन करने का ,

मात्र बचा है मार्ग स्वयं को अर्पण करने का ,

राष्ट्र निर्माण में अपनी आहुति   देनी है,

 

अरुण त्यागी /दिल्ली /२८/०४/२०१२

 

 

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