रितु पावस आई या भागन ते संग लाल के कुंजन मेँ बिहरौ

रितु पावस आई या भागन ते संग लाल के कुंजन मेँ बिहरौ ।
नहिँ पाइहौ औसर ऎसो भटू अब काहे को लाज लजाइ मरौ ।
गुरु लोग औ चौचंदहाइन सोँ बिरथा केहि कारन बीर डरौ ।
चलि चाखौ सुधा अभिलाखैं भरौ यहि पाखैँ पतिब्रत ताखैँ धरौ ।

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