योगी वही जो रँगै मन आपनो आन सुसँग मे ध्यान लगावै

योगी वही जो रँगै मन आपनो आन सुसँग मे ध्यान लगावै ।
सँत वही जो तजै ममता अरु आनन्द मे हरि के गुन गावै ।
पुत्र वही जो पिता को नवै अरु कै पुरुषारथ को दिखलावै ।
द्रव्य वही जो उठै परस्वारथ मित्र वही जो विपत्ति बटावै ।

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