उसकी पहली नज़र ही असर कर गयी

उसकी पहली नज़र ही असर कर गयी
एक पल में ही दिल में  वो घर कर गयी

हर गली कर गयी हर डगर कर गयी                                                                                                                                   मुझको रुसवा तेरी इक नज़र कर गयी

 

मैंने देखा उसे देखता रह गया
मुझको खुद से ही वो बेखबर कर गयी
साथ चलने का तो मुझसे वादा किया
वो तो तन्हा ही लेकिन सफ़र कर गयी
जिस घडी पड़ गयी इक नज़र  यार की
एक ज़र्रे को शम्सो कमर कर गयी

हमने मांगी थी ‘हसरत’ जो रब से दुआ
वो दुआ अब यक़ीनन असर कर गयी

…………………………….SAARIF AHMED QADRI ‘HASRAT’

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