आँखों का समंदर

अपनी आँखों का समंदर बना ले मुझको,
ग़म अगर हो कोई,आँखों से बहा दे मुझको,
तेरा हमदम ना सही, दोस्त भी मत मान मुझे,
ग़र शिकायत है कोई मुझसे,सजा दे मुझको,
तेरा हमराज बना था,तेरा हमदर्द अब भी,
डूब जाऊँगा भँवर में,बचा ले मुझको,

 

कवि – मोहित कुमार

2 Comments

  1. Yashwant Mathur 18/05/2012
  2. Smitashrivastava63 19/05/2012

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