मन के घोंसले की नन्ही चिड़िया

मन के घोंसले की

नन्ही चिड़िया

निरंतर उड़ान

भरने को आतुर

ना विश्राम ,

ना चैन उसको

ये भी पता नहीं

कितना उड़ना है ?

कहाँ जाना है ?

अनंत इच्छाओं की

मरीचिका में उलझी है

संतुष्टी की चाह में

असंतुष्ट जीती है

12-05-2012
517-31-05-12

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