रात ढलती नहीं वक्त कटते नहीं

रात ढलती नहीं वक्त कटते नहीं
आंसुओं से  ये पत्थर पिघलते नहीं
हमसफर भी हमें कुछ ऐसा मिला
साथ में दो कदम साथ चलते नहीं
रिश्ता दर्दो से अपना कुछ यूँ हो गया है
इन दर्दो से अब हम तडपते नहीं
ख्वाब देखे थे जो वो टूटे सभी
टूट कर भी अब हम बिखरते नहीं
चंद मिनटों का साथ जो तुम्हारा मिला
रोकने से भी वो पल ठहरते नहीं
लोकेश सतायेंगे तुमको ही सभी
रोने से भी ये दर्द घटते नहीं
रात ढलती नहीं ……………………..
लोकेश उपाध्याय

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