खतरा अस्तित्व का

एक बादल का टुकड़ा

खरगोश के छौने जैसा

फ़ुदक रहा है

इन काले पहाड़ों के ऊपर

बरसने को आतुर्।

पर सहम जाता है

बार बार

पहाड़ों की कठोरता

और उनके बीच से

निकलती हुई

लपटों को देखकर

कि कहीं वे

उसका अस्तित्व ही

न समाप्त कर दें।

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हेमन्त कुमार

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