पावतो अहार मन भावतो अधिक

पावतो अहार मन भावतो अधिक ,
एक सेर अरहरि की जु दाल और दलतो ।
चूल्हो न जरायो तापै माँगत है भोजन ,
सरम नाहिँ तोको करि कारो मुख टलतो ।
तेरी हौँ गुलाम केधौँ मेरो तैँ गुलाम ,
करु काम न अराम को इहाँ है फल फलतो ।
कहत लुगाई ऎरे पति पशु मेरे ,
तोपै लादती गरभ जो पै मेरो बस चलतो ।

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