न्हातई न्हात तिहारेई स्याम कलिन्दजा स्याम भई बहुतै है

न्हातई न्हात तिहारेई स्याम कलिन्दजा स्याम भई बहुतै है ।
धोखेहु धोये हौँ यामे कहूँ तो यहै रँग सारिन मेँ सरसैहै ।
सांवरे अंग को रँग कहूँ यह मेरे सुअँगन मेँ लगि जैहै ।
छैल छबीले छुऔगे जु मोँहि तो गात मेँ मेरे गोराई न रैहै ।

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