नित चातक चाय सोँ बोल्यो करै मुरवान को सोर सुहावन है

नित चातक चाय सोँ बोल्यो करै मुरवान को सोर सुहावन है ।
चमकै चपला चँहु चाव चढ़ी घनघोर घटा बरसावन है ।
पलकौ पपिहा न रहै चुप ह्वै अरु पौन चहूँ दिसि आवन है ।
मिलि प्यारी पिया लपटैँ छतियाँ सुख को सरसावन सावन है ।

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