एक नया सा जहाँ बसायेंगे…

एक नया सा जहाँ बसायेंगे.

शामियाने नये सजायेंगे..

जहाँ खुशियों की बारिशें होंगी.

गम की ना कोई भी जगह होगी..

रात होगी तो बस सुकूं के लिये.

खिलखिलाती हुई सुबह होगी..

कोई किसी से ना नफरत करेगा.

करेगा प्यार, मोहब्बत करेगा..

जहाँ बच्चे ना भूखे सोयेंगे.

अपना बचपन कभी ना खोयेंगे..

देश का होगा, विकास जहाँ.

नेता होंगे सुभाष जैसे जहाँ..

जुल्म की दस्तां नहीं होगी.

अश्क से आँख ना पुरनम होगी..

राम-रहीम में, होगा ना कोई फर्क यहाँ.

ऐ खुदा तू भी, रह सकेगा जहाँ – २..

ना बना पाये, इस धरती को हम, स्वर्ग तो क्या.

इन्सां के रहने के, काबिल तो बना सकते हैं…

इन्सां के रहने के, काबिल तो बना सकते हैं…

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