हम चुप हैं कि दिल सुन रहे हैं

हम चुप हैं कि दिल सुन रहे हैं
धड़कनों को आहटों को
साँसें रुक सी गई हैं
हम चुप हैं …

देखो अब दुनिया को गौर से
पहले से नई पहले से हसीं
हम तुमको मिलना था मिल गए
क्या ये आसमाँ कौन ये ज़मीं
हम जो देखें तुमको देख
साँसें रुक सी गई हैं
हम चुप हैं …

लफ़्ज़ों में जिनको ना कह सके
आँखों से कहें होंठों से सुनें
ख़ुश्बू के साए में बैठ के
फूल हम चुनें ख़्वाब हम बुनें
इसके आगे कुछ ना सोचें
साँसें रुक सी गई हैं
हम चुप हैं …

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