अस्पताल, चिकित्सक और दर्द …..

जब –
बीमार अस्पताल की
बीमार खाट पर पडी – पडी
मेरी बूढ़ी बीमार माँ
खांस रही थी बेतहाशा
तब महसूस रहा था मैं
कि, कैसे –
मौत से जूझती है एक आम औरत ।

कल की हीं तो बात है
जब लिपटते हुये माँ से
मैंने कहा था , कि –
माँ, घवराओ नही ठीक हो जाएगा सब ….. ।

सुनकर चौंक गयी माँ एकवारगी
बहने लगे लोर बेतरतीब
सन् हो गया माथा
और, माँ के थरथराते होंठों से
फूट पडे ये शब्द –
“क्या ठीक हो जाएगा बेटा !
यह अस्पताल ,
यह डॉक्टर ,
या फिर मेरा दर्द ……..?

3 Comments

  1. Yashoda Agrawal 04/05/2012
  2. Madhuresh 05/05/2012
  3. kavita Rawat 05/05/2012

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