जाके लगे गृहकाज तजे अरु मातु पिता हित नात न राखै

जाके लगे गृहकाज तजे अरु मातु पिता हित नात न राखै ।
सागर लीन ह्वै चाकर चाह के धीरज हीन अधीर ह्वै भाखै ।
ब्याकुल मीन ज्योँ नेह नवीन मेँ मानो दई बरछीन की साखै ।
तीर लगै तरवारि लगै पै लगै जनि काहूँ सोँ काहू की आँखै ।

Leave a Reply