चँदमयी चम्पक जराव जरकस मयी

चँदमयी चम्पक जराव जरकस मयी ,
आवत ही गैल वाके कमलमयी भई ।
कालिदास मोहमद आनँद बिनोदमयी ,
लालरँग मयी भयी बसुधा मई ,
ऎसी बनि बानिक सोँ मदन छकाई ,
रसकहि की निकाई लखि लगन लगी नई ।
नेह को हितै करि गोपाल मोह दैकरि ,
सखीन दुचितै करि चितै करि चली गई ।

Leave a Reply