घोटालों के दोषी…

यूँ ही छत की मुन्डेर पर खडे मैं सोच रहा था,

हाल ही में हुए घोटालों के बारे में,

और उनसे जुडे लोगों के बारे में.

मीडिया ने बताया –

– उन नेताओं के बारे में,

जो इन घोटालों से हुए हैं,

सबसे ज्यादा लाभान्वित,

चंद महीनों की जेल हुई.

और कुछ दागी होते हुए भी,

रहे बेदाग!

– उन कम्पनीज के बारे में,

जिन्होंने उनसे करोडों कमाए,

या जिनके डूब गए करोडों,

और बन्द हो गए।

पर भूल गई मीडिया,

इन घोटालों से प्रभावित होने वाले,

– उन लोगों को,

जिनपर इनका सीधा प्रभाव पडता है,

वो हैं इनमें काम करने वाले,

आम लोग!

जो हो गए हैं आज

बेरोजगार!

और हैं मजबूर, लाचार,

करने को कुछ भी,

आत्महत्या भी??

आखिर क्यों भूल जाती है,

ये मीडिया, ये कम्पनीज,

और ये सरकार?

कि इनकी भी रोजी-रोटी

चलती है, इन्हीं बेरोजगार,

बेसहारा, लाचार और मजबूर,

आम लोगों से;

जिनके पास, आज नहीं तो कल,

इन्हें जाना ही है,

झूठे वादे, झूठे दिलासे लेकर,

इन आम लोगों की बेबसी का,

एक बार फिर फायदा उठाने.

आखिर क्यों भूल जाते हैं,

लोकतन्त्र के ये शाह,

आम लोगों को???

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