बुरा न बोलो बोल रे

बुरा न देखो,  बुरा सुनो ना,  बुरा न बोलो बोल रे,

वाणी में मिसरी तो घोलो,  बोल-बोल को तोल रे।

 

मानव  मर जाता है लेकिन,

शब्द  कभी  ना   मरता  है।

शब्द-बाण से आहत मन का,

घाव  कभी  ना   भरता  है।

सौ-सौ बार सोच कर बोलो, बात यही अनमोल रे,

बुरा न देखो,  बुरा सुनो ना,  बुरा न बोलो बोल रे।

 

पांचाली  के  शब्द-बाण से,

कुरूक्षेत्र   रंग  लाल  हुआ।

जंगल-जंगल  भटके पांडव,

चीरहरण, क्या हाल  हुआ।

अच्छा  बोल सको तो बोलो, वर्ना मुँह मत खोल रे,

बुरा न देखो,  बुरा सुनो ना,  बुरा न बोलो बोल रे।

 

जो   देखोगे   और  सुनोगे,

वैसा  ही  मन  हो जायेगा।

अच्छी  बातें, अच्छा दर्शन,

जीवन  निर्मल हो जायेगा।

अच्छा मन,सबसे अच्छा धन, मनवा जरा टटोल रे,

बुरा न देखो,  बुरा सुनो ना,  बुरा न बोलो बोल रे।

 

कोयल  बोले  मीठी वाणी,

कानों   में   रस   घोले  है।

पिहु-पिहु मन मोर नाचता,

सबके   मन   को  मोहे  है।

खट्टी अमियाँ  खाकर मिट्ठू,  मीठा-मीठा  बोल  रे।

बुरा न देखो, बुरा सुनो ना,  बुरा न  बोलो बोल रे।

 

…..आनन्द विश्वास

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  1. sarthi 05/06/2012

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