कोऊ न आयो उहाँ ते सखी री जहाँ मुरलीधर प्रान पियारे

कोऊ न आयो उहाँ ते सखी री जहाँ मुरलीधर प्रान पियारे ।
याही अँदेसे मे बैठी हुती उहि देस के धावन पौरि पुकारे ।
पाती दई धरि छाती लई दरकी अँगिया उर आनँद भारे ।
पूँछन को पिय की कुसलात मनो हिय द्वार किवार उघारे ।

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