यही आजकल मेहरबां देखते हैं, [गज़ल]

यही    आजकल    मेहरबां     देखते     हैं,

मेरा दिल जला के धुआं देखते हैं !!

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वो   क़द से    बड़ा    आसमां    देखते हैं,

कहां    पर    खड़े   हैं कहां   देखते    हैं !!

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बहुत याद आती है मां की  नसीहत,

कोई जब भी उजड़ा मकां देखते हैं !!

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