स्वर्ग तो ‘माँ’ की ही गोद मिले है…

मुद्दत बाद वो हमसे मिले हैं.

जाने कैसे दिल पिघले हैं..

ये दर्द ना पूछो किसने दिये हैं.

हमने तो अपने होंठ सिले हैं..

इश्क में दीवाली पर ऐ ‘श्वेत’.

दीप नहीं, दिल ही तो जले हैं..

झूठ की आँखों पर पट्टी है.

पर सच के तो होंठ सिले हैं..

दोनों जहाँ जब भटके तो समझे.

स्वर्ग तो ‘माँ’ की ही गोद मिले है…

 

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