कामरी कारी कँधा पर देखि अहीरहिँ बोलि सबै ठहरायो

कामरी कारी कँधा पर देखि अहीरहिँ बोलि सबै ठहरायो ।
जोई है सोई है मेरो तो जीव है याको मैँ पाय सभी कुछ पायो ।
कामरी लीन्होँ उढ़ाय तुरँतहि कामरी मेरो कियो मन भायो ।
कामरी तो मोहि जारो हुतो बरु कामरी वारे बिचारे बचायो ।

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