ऊँची सी उसासैँ लै लै पूछत है परोसिन सोँ

ऊँची सी उसासैँ लै लै पूछत है परोसिन सोँ ,
मेरे उर कठिन कठोर भए बाँके हैँ ।
ताके अति सोचन तेँ कछू ना सोहात मोहिँ ,
कीजिये उपाय ये पिरात नहिँ पाके हैँ ।
मदन कहै तू ना डेराय अलबेली बाल ,
ये है रति जाल जीव पोखन सुधा के हैँ ।
होत उर जाके पीर होत नहिँ ताके ,
जौन इन्हैँ कोऊ ताकै पीर होत उर ताके हैँ ।

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