यूँ भी बनता है इतिहास

अतीत की छाया
जब वर्तमान पर पड़ती है
जन्म लेता है इतिहास
तानाशाहों के भय से
या उन्हें प्रसन्न करने के लिए
एक पूरे काल की ममी बना कर
पढ़े-लिखे सम्भ्रांत लोगों द्वारा
मिस्र के सम्राटों की तरह
दफ्न कर दिया जाता है
शब्दों और भावनाओं के ईंट गारे से बने
पिरामिड में।

मर चुका होता है यह काल
इसलिए कोई ख़तरा नहीं होता
इसके भव्य शरीर के टुकड़े करके
अपनी पसंद के अंग लगाने में।

इसे ले जाया जाता है
किसी अमानवीय प्रयोगशाला में
लगाए जाते हैं
इसके हाथों की जगह
किसी गुरिल्ले का हाथ
आँखों की जगह साँप की आँखें
दाँतों की जगह भेड़िये के दाँत।

यथार्थ विकृत हो जाता है
व्यवस्था के हाथ में आते ही
एक शीत-युद्ध शुरू हो जाता है
अतीत और वर्तमान में
दु:स्वप्न बन जाता है
आम लोगों का भविष्य-
एक ऐसी भारी जंज़ीर
जिसके बोझ तले
घिसटती और सिसकती रहती है मानवता
सदियों।

इतिहास में बच जाते हैं
केवल गुरिल्ले के हाथ
साँप की आँखें
भेड़िये के दाँत
और किसी दानव का क्रूर-अटट्हास ।

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