भीख

किसी मन्दिर की घन्टी से
डरा सहमा हुआ भगवान
इक टूटे हुए वीरान घर में जा छुपेगा
और पुजारी
ख़ून में डूबे हुए त्रिशूल लेकर
देवियों और देवताओं को पुकारेंगे।

सलीबें भी सभी ख़ाली मिलेंगी
हर तरफ़ गिरजाघरों में
क्योंकि सब मासूम, भोले लोग
गली के मोड़ पर सूली से लटके
दुआ-ए-मग़फ़िरत में हर घड़ी मसरुफ़ होंगे
क़ातिलों के वास्ते।

अज़ानों में
ख़ुदा-ए-पाक के हर ज़िक्र के बदले
शायद किसी क़ह्हार या जब्बार की
हम्दो-सना होगी।

हम अपनी ख़ैरियत की भीख मांगेंगे
ख़ुदा के नेक बन्दों से !

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