बयान

मैं देख रहा हूँ
बहुत दिनों से

क़ातिल का चमकता ख़न्जर
ख़न्जर से टपकती लहू की बूंद
और इस बूंद से
माथे पर तिलक करता इतिहास

धरती की कोख में
तेज़ाबी झरनों की तरह गिरती
हवस की धार

परभक्षियों का
शान्ति दूत की तरह
भव्य स्वागत किया जाना

में देख रहा हूँ
बहुत दिनों से

लुटेरों की तिजोरियों में पड़ा
बेशुमार धन
जिसका कोई ब्योरा नहीं
आयकर विभाग के पास

प्यार के नाम पर
प्यार के सिवा सब-कुछ करके
अथाह प्यार पाने वाले

पूरा साल नागपंचमी है
साँपों के लिए ।

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