कोई नहीं सुनता

घायल शेर
गरजता है ज़ोर-ज़ोर से
इतना कि ख़बर हो जाती है
सारे जंगल को
और यक़ीन कर लिया जाता है
कोई अन्याय जरूर हुआ है
शेर के साथ

शेर के मज़बूत जबड़े में दबी
मेमने की गर्दन से निकलने वाली मिमियाहट
कोई नहीं सुनता
घास पर टपकने वाली
ख़ून की बूंद के सिवा!

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