एक ख्वाबों का करबला होगा

एक ख़्वाबों का करबला होगा
ख़ुश्क आँखों में और क्या होगा

पेड़ साहिल पे जो खड़ा होगा
राह मौज़ों की देखता होगा

सैकड़ों लोग चाँद से होंगे
कोई लेकिन न आप सा होगा

आसमां पर तो अब्र रोता है
मोर जंगल में नाचता होगा

मुझपे अहसां कोई नहीं करना
मुझपे अहसां और क्या होगा

ये नया शहर है ख़ुदा जाने
कैसे लोगों से वास्ता होगा

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